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लक्षचंडी यज्ञ एवं पाठ

लक्षचंडी यज्ञ और पाठ एक बहुत ही अद्वितीय यज्ञोपवीत संस्कार है जिसमें शक्तिशाली सप्तशती मंत्र शामिल हैं और इसमें दुर्गा सप्तशती पाठ के 1 लाख पाठ शामिल हैं। यह पूजा अनुष्ठान बहुत ही दुर्लभ और अद्वितीय है। इस पूजा और यज्ञ में एक महान गुण होता है जो दिव्य देवी से असीम आशीर्वाद दिलाता है। सभी क्षेत्रों में अपार ऊर्जा, नाम, प्रसिद्धि, शक्ति, विजय, स्वास्थ्य और सफलता पाने के लिए दुर्गा सप्तशती का जप करना लाभदायक होता है।  यह मानसिक शक्ति को बढ़ाता है और व्यक्ति को भौतिक समृद्धि प्राप्त करने में मदद करता है।

दिव्य माँ से अपार आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए, लक्ष चंडी पाठ और यज्ञ कर सकते हैं। इस पूजा को अनुष्ठान करने से ऋणों से मुक्ति मिलती है और सभी प्रकार के दुर्भाग्य और संकटों (पीड़ा) से मुक्ति प्राप्त होती है। यह उपासक को सफलता, अधिकार और शक्ति प्रदान करता है और जीवन में आने वाले सभी बुरे विचारो और बुरी शक्तियों का नाश करता है। दुर्गा सप्तशती पाठ के लक्षचंडी स्तोत्र का जप करने से आध्यात्मिकता बढ़ती है, सकारात्मक ऊर्जा जागृत होती है और मोक्ष का मार्ग खुलता है।
यह उपासक को सफलता, अधिकार और शक्ति प्रदान करता है| इस यज्ञ को समाज में भाईचारे को बढ़ाने के लिए एक प्रतीक के रूप में भी माना जाता है।

इस यज्ञ के साथ हम समाज में समानता के संदेश के साथ,  प्रेम और भाईचारा फैलाने का हमारा उद्देश्य है |
लक्षचंडी स्तोत्र जप करने से आध्यात्मिकता बढ़ती है, सकारात्मक ऊर्जा  का निर्माण  होता है, और मोक्ष का मार्ग खुलता है। यह उपासक को सफलता, स्वास्थ्य और शक्ति प्रदान करता है|  यह यज्ञ व्यावहारिक जीवन में सकारात्मकता भी लाता है और कार्य कुशलता बढ़ाता है। एवं आध्यात्मिक वातावरण और ईश्वर में विश्वास बढ़ाता है ।

वेलनिक इंडिया का लक्षचंडी यज्ञ करने का उद्देश्य वेलनिक परिवार में समानता, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा का सृजन करना है तथा वेलनिक परिवार में दृढ़ता और कार्य कुशलता में वृद्धि करना है और वेलनिक इंडिया परिवार की बाधाओं और परेशानियों को दूर करना है|
यज्ञ का प्रभाव सुसंस्कृत बना देता है। यज्ञ को पाप नाशक भी कहा गया है। आधुनिक विज्ञान के युग में आज भी यज्ञ और हवन की महत्ता को स्वीकारा जाता है। स्वाहा-स्वाहा और दैवीय मंत्रों की गूंज और यज्ञ के लिए बनाए गए हवन कुंड में दी जाने वाली आहुति का मनुष्य की भीतरी चेतना पर क्या प्रभाव पड़ता है,

वेलनिक इंडिया परिवार ने बीते वर्ष मई २०२१ में लक्ष्यचंडी पाठ का संकल्प लिया था, जिसमे १ लाख सप्तसती पाठों का जाप किया जाता है। इस संकल्प को वेलनिक इंडिया परिवार ने अप्रैल २०२२ में १०८ विप्रजनों के सानिध्य एवं माँ दुर्गा के आशीर्वाद से पूरे विधि-विधान के साथ  सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। जिसकी पूर्ण आहुति का आयोजन वेलनिक इंडिया संस्थान के प्रांगड़ में स्थित माँ दुर्गा के मंदिर में १६ अप्रैल से १६ मई २०२२ को किया जा रहा है जिसमे आप सभी श्रद्धालुजन सादर आमंत्रित है। कृपया पधारकर धर्म लाभ अर्जित करे।

वेलनिक इंडिया परिवार का वर्ष २०३५ तक ११ लक्षचंडी पाठ एवं यज्ञ पूर्ण करने का उद्देश्य है |

 

आहुति

यज्ञ करते समय हवन या अग्नि यज्ञ करने की प्रथा है। अग्नि को औपचारिक रूप से जलाया जाता है, अग्नि, अग्नि देव को आमंत्रित करने का प्रतीक है। तत्पश्चात जब मंत्रों का जाप किया जाता है, तो मंत्र के अंत में घी या हवन सामग्री (जड़ी-बूटियों और घी का मिश्रण) के रूप में अर्पण किया जाता है।.

पाठ

धार्मिक ग्रंथो एवं मंत्रो का शुद्धता पूर्वक वाचन एवं उच्चारण करने को पाठ कहा जाता है| हिंदू धर्म में पाठ करना एक जरूरी प्रक्रिया मानी गई है। पाठ से जहां व्यक्ति को आत्मीय सुख और शांति प्राप्ति होती है वहीं इससे भगवान का आशीर्वाद भी मिलता है।.

यज्ञ

मत्स्यपुराण में कहा गया है कि जब पांच आवश्यक घटक - देवता, हवन द्रव्य या प्रसाद, वेद मंत्र, दैवीय नियम और ब्राह्मण को उपहार - होते हैं, तो यह एक यज्ञ है। विश्व कल्याण के लिए किया गया कोई भी शुभ कार्य यज्ञ है।.

लक्षचंडी महायज्ञ पूर्ण आहुती

 

वेलनिक इंडिया के संस्थापक श्री सुखदेव गेहलोत जी ने विगत वर्ष मई २०२१ में लक्षचंडी पाठ अनुष्ठान आरम्भ किया था, लक्षचंडी पाठ में १ लाख सप्तशती पाठ होते है जो की अप्रैल २०२२ में पूर्ण हुआ, इस अनुष्ठान की पूर्णाहुति १६ अप्रैल २०२२ से १६ मई २०२२ तक है | पूर्णाहुति के लिए भव्य एवं विशाल यज्ञशाला का निर्माण वेलनिक इंडिया के प्रांगड़ में किया गया है| इसमें ३०० विद्वान् गुरुजन एवं पंडित द्वारा आहुति प्रदान की जा रही है | लक्षचंडी महायज्ञ पूर्णहुति विधि विधान से चल रहा है |
यज्ञ का समय रोजाना :
प्रथम प्रातः 7:00 से 9:30 | द्वितीय: 10:00 से 12 :30 | तृतीय: 1:00 से 3:30 | चतुर्थ: 4:00 से 6:30 | संध्या: 7:00 बजे महाआरती

बगलामुखी यज्ञ

शुद्ध सात्विक रूप में मां बगलामुखी संसार का कल्याण करने वाली देवी हैं। बगलामुखी माता की पूजा; शक्ति और विजय के लिए की जाती है। पीताम्बरा विद्या के नाम से विख्यात मां बगलामुखी की साधना प्रायः शत्रुभय से मुक्ति और वाकसिद्धि के लिये की जाती है। माता स्वयं पीली आभा से युक्त हैं और इनकी पूजा में पीले रंग का विशेष प्रयोग होता है | बगलामुखी माता को स्तम्भन शक्ति की देवी माना जाता है| इनका यज्ञ दुष्ट व्यक्तियों, आत्माओं और यक्षिणी के प्रभाव को दूर करने में भी लाभकारी है। इस यज्ञ और यज्ञ के पूरा होने के बाद, देवी बगलामुखी अपने भक्तों को जीवन की सभी परेशानियों से लड़ने और सुख और धन से भरपूर जीवन जीने की शक्ति प्रदान करती हैं। भक्त के शत्रु भी नष्ट हो जाते हैं और भक्त के चारों ओर कोई भी बुरी शक्ति नहीं घूमती है।

सृष्टि में यज्ञ एक अनादि महानुष्ठान है। यज्ञ से देवी-देवता, मनुष्य अर्थात संसार के सभी प्राणियों का जनकल्याण होता है। यज्ञ की ऊष्मा मनुष्य के अंतःकरण पर देवत्व की छाप डालती है। जहाँ यज्ञ होते हैं, वह भूमि एवं प्रदेश सुसंस्कारों की छाप अपने अन्दर धारण कर लेता है और वहाँ जाने वालों पर दीर्घकाल तक प्रभाव डालता रहता है। जिन घरों में, जिन स्थानों में यज्ञ होते हैं, वह भी एक प्रकार का तीर्थ बन जाता है और वहाँ जिनका आगमन रहता है, उनकी मनोभूमि उच्च, सुविकसित एवं सुसंस्कृत बनती हैं।

वेलनिक इंडिया द्वारा आयोजित बगलामुखी यज्ञ

वेलनिक इंडिया 2020 में मां बगलामुखी अखंड यज्ञ आरंभ किया गया था, जो की तभी से निरंतर चला आ रहा है | वेलनिक इंडिया द्वारा आयोजित मां बगलामुखी यज्ञ हर रात्रि वेलनिक इंडिया के प्रगंड में होता है, यह यज्ञ की पूर्णाहुति 2025. में होगी | वेलनिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक श्री सुखदेव गेहलोत जी पूरे विधि विधान से बगलामुखी यज्ञ हर रात्रि पूर्ण करते है|

“ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै सर्व दुष्टानाम वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिह्वाम कीलय-कीलय बुद्धिम विनाशाय ह्लीं ॐ नम:”

 

वेलनिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की चतुर्थ वर्षगांठ के सुअवसर पर दिनांक रू 05.07.2022 को 11 कुंडीय पुष्पबंगले में बगलामुखी महायज्ञ 111000 आहुतियों के साथ 311 ब्राह्मणों द्वारा संपन्न किया जाएगा एवं मातारानी को स्वर्ण की आहुति दी जायगी |” केक काटकर वर्षगांठ को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा “

Baglamukhi Yagya

 

 

आहुति

यज्ञ करते समय हवन या अग्नि यज्ञ करने की प्रथा है। अग्नि को औपचारिक रूप से जलाया जाता है, अग्नि, अग्नि देव को आमंत्रित करने का प्रतीक है। तत्पश्चात जब मंत्रों का जाप किया जाता है, तो मंत्र के अंत में घी या हवन सामग्री (जड़ी-बूटियों और घी का मिश्रण) के रूप में अर्पण किया जाता है।.

पाठ

धार्मिक ग्रंथो एवं मंत्रो का शुद्धता पूर्वक वाचन एवं उच्चारण करने को पाठ कहा जाता है| हिंदू धर्म में पाठ करना एक जरूरी प्रक्रिया मानी गई है। पाठ से जहां व्यक्ति को आत्मीय सुख और शांति प्राप्ति होती है वहीं इससे भगवान का आशीर्वाद भी मिलता है।.

यज्ञ

मत्स्यपुराण में कहा गया है कि जब पांच आवश्यक घटक - देवता, हवन द्रव्य या प्रसाद, वेद मंत्र, दैवीय नियम और ब्राह्मण को उपहार - होते हैं, तो यह एक यज्ञ है। विश्व कल्याण के लिए किया गया कोई भी शुभ कार्य यज्ञ है।.

सहस्त्र चंडी यज्ञ

माँ दुर्गा को शक्ति की देवी का जाता है| दुर्गा माँ को प्रसन्न करने के लिए जिस यज्ञ विधि को पूर्ण किया जाता है, उससे सहस्त्र चंडी यज्ञ कहा जाता है | सहस्त्र चंडी यज्ञ को सनातन धर्म में बेहद शक्तिशाली वर्णित किया गया है| इस यज्ञ से बिगड़े हुए ग्रहों की स्तिथि को सही किया जा सकता है, और इस विधि को पूर्ण करने के बाद भाग्य आपका साथ देने लगता है|

इस यज्ञ के बाद मनुष्य खुद को एक आनंदित वातावरण में महसूस करता है| वेदों में इसकी महिमा के बारे में यहाँ तक बताया गया है की सहस्त्र चंडी यज्ञ पूर्ण करने के बाद आपके शत्रु भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकते है| इस यज्ञ को गणेश जी, शिवजी, नव ग्रह, और नव दुर्गा (देवी) को समर्पित करने से मनुष्य का जीवन धन्य होता है|

वेलनिक इंडिया संस्थान प्रत्येक वर्ष चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि में सहस्त्र चंडी यज्ञ का आयोजन करती है | प्रत्येक वर्ष सहस्त्र चंडी यज्ञ का आयोजन वेलनिक इंडिया के प्रांगण में स्थित देवी माँ के मंदिर में विधि विधान से संपन्न होता है |

प्रार्थना करो! और भगवान की सुनो!

  1. हमेशा, हर जगह भगवान मौजूद है।
  2. मैं साधारण चीजों से ही खुद को खुश पाता हूं।.
  3. जीवन अच्छा है क्योंकि ईश्वर महान है।” अनाम”

 

 

आहुति

यज्ञ करते समय हवन या अग्नि यज्ञ करने की प्रथा है। अग्नि को औपचारिक रूप से जलाया जाता है, अग्नि, अग्नि देव को आमंत्रित करने का प्रतीक है। तत्पश्चात जब मंत्रों का जाप किया जाता है, तो मंत्र के अंत में घी या हवन सामग्री (जड़ी-बूटियों और घी का मिश्रण) के रूप में अर्पण किया जाता है।

पाठ

धार्मिक ग्रंथो एवं मंत्रो का शुद्धता पूर्वक वाचन एवं उच्चारण करने को पाठ कहा जाता है| हिंदू धर्म में पाठ करना एक जरूरी प्रक्रिया मानी गई है। पाठ से जहां व्यक्ति को आत्मीय सुख और शांति प्राप्ति होती है वहीं इससे भगवान का आशीर्वाद भी मिलता है।

यज्ञ

मत्स्यपुराण में कहा गया है कि जब पांच आवश्यक घटक - देवता, हवन द्रव्य या प्रसाद, वेद मंत्र, दैवीय नियम और ब्राह्मण को उपहार - होते हैं, तो यह एक यज्ञ है। विश्व कल्याण के लिए किया गया कोई भी शुभ कार्य यज्ञ है।

नवचंडी यज्ञ

नवचंडी यज्ञ सनातन धर्म में वर्णित सबसे शक्तिशाली यज्ञों में से एक है। नवचंडी यज्ञ को नव दुर्गा पूजा के रूप में भी जाना जाता है |

यह हिंदू धर्म में सबसे प्रसिद्ध यज्ञ है। यह पूरे भारत में बहुत सारे त्योहारों के दौरान विशेष रूप से नवरात्रि में किया जाता है। यह यज्ञ शास्त्री जी द्वारा किया जाता है और 700 मंत्रों का प्रयोग किया जाता है। नवचंडी यज्ञ पूरे वातावरण में सकारात्मक आभा उत्पन्न करता है।

नवचंडी हवन में माँ दुर्गा के नौ अवतारों की पूजा की जाती है।
नौ अवतार हैं:

  1. शैलपुत्री
  2. ब्रह्मचारिणी
  3. चंद्रघंटा कूष्मांडा
  4. स्कंदमाता
  5. कात्यायनी
  6. कालरात्रि
  7. महागौरी
  8. सिद्धिदात्री
  9. दुर्गा सप्तशती

यह देवी दुर्गा के महत्व और उनके 3 शक्ति / शक्ति तत्व का वर्णन करता है। दुर्गा सप्तशती मुख्य रूप से अच्छे और बुरे के बीच क्रूर युद्ध की व्याख्या करती है। सर्वोच्च ऊर्जा की देवी उन्हें विभिन्न रूपों में प्रदर्शित करती हैं ताकि शांति और समृद्धि बनी रहे। यह पाठ इस तथ्य की नींव रखता है कि अंतिम वास्तविकता महिला ऊर्जा से ज्यादा कुछ नहीं है। दुर्गा सप्तशती पाठ में नारी को ब्रह्मांड की प्रारंभिक निर्माता के रूप में समझाया गया है। पाठ उसे त्रिदेवियां निर्माता, पोषणकर्ता और विध्वंसक जैसी शाखाओं के रूप में समझाता है।

नवचंडी हवन पूजा एक विस्तृत, विशिष्ट और दुर्लभ पूजा है जो आमतौर पर नवरात्रि के समय की जाती है। नव चंडी पूजा और पाठ का महत्व अनिवार्य रूप से नवरात्रि में है। दुर्गा सप्तशती का पाठ सामान्य रूप से किया जाता है। यह एक मजबूत मन्नत अनुष्ठान है। यह हर दिन नवरात्रि के समय दुर्गा सप्तशती पाठ के मंत्र जाप की ताकत से समझौता करता है। नव चंडी एक विशिष्ट पूजा है। दुर्गा सप्तशती मंत्र की शक्ति और नवरात्रि के दौरान इसका पाठ करना। पूजा और यज्ञ से सभी ग्रहों के दुष्प्रभाव समाप्त हो जाते हैं।

आहुति

यज्ञ करते समय हवन या अग्नि यज्ञ करने की प्रथा है। अग्नि को औपचारिक रूप से जलाया जाता है, अग्नि, अग्नि देव को आमंत्रित करने का प्रतीक है। तत्पश्चात जब मंत्रों का जाप किया जाता है, तो मंत्र के अंत में घी या हवन सामग्री (जड़ी-बूटियों और घी का मिश्रण) के रूप में अर्पण किया जाता है।.

पाठ

धार्मिक ग्रंथो एवं मंत्रो का शुद्धता पूर्वक वाचन एवं उच्चारण करने को पाठ कहा जाता है| हिंदू धर्म में पाठ करना एक जरूरी प्रक्रिया मानी गई है। पाठ से जहां व्यक्ति को आत्मीय सुख और शांति प्राप्ति होती है वहीं इससे भगवान का आशीर्वाद भी मिलता है।.

यज्ञ

मत्स्यपुराण में कहा गया है कि जब पांच आवश्यक घटक - देवता, हवन द्रव्य या प्रसाद, वेद मंत्र, दैवीय नियम और ब्राह्मण को उपहार - होते हैं, तो यह एक यज्ञ है। विश्व कल्याण के लिए किया गया कोई भी शुभ कार्य यज्ञ है।.

 

 

कन्या भोज

नवरात्रि के दिनों को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है| भक्त माता की नौ दिनों व्रत रख कर पूजा आराधना करते हैं|

मान्यता है कि बिना कन्या पूजन के नवरात्रि का पूरा फल नहीं मिलता है। इससे माता रानी प्रसन्न होती हैं और सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। नवरात्रि के नौ दिन मां के नौ रूपों की पूजा होती है और कन्या पूजन के जरिये मां के उन नौ रूपों की एक साथ पूजा की जाती है और उनसे अपने घर-परिवार पर कृपा|

वेलनिक इंडिया संस्थान बीते कई वर्षो से प्रत्येक चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि में कन्या भोज का आयोजन विशाल स्तर पर करते आए है |प्रत्येक वर्ष ५१०० से अधिक कन्याएं वेलनिक इंडिया में पधारती रही है |

 

  • और कन्या भोज

आहुति

यज्ञ करते समय हवन या अग्नि यज्ञ करने की प्रथा है। अग्नि को औपचारिक रूप से जलाया जाता है, अग्नि, अग्नि देव को आमंत्रित करने का प्रतीक है। तत्पश्चात जब मंत्रों का जाप किया जाता है, तो मंत्र के अंत में घी या हवन सामग्री (जड़ी-बूटियों और घी का मिश्रण) के रूप में अर्पण किया जाता है।.

पाठ

धार्मिक ग्रंथो एवं मंत्रो का शुद्धता पूर्वक वाचन एवं उच्चारण करने को पाठ कहा जाता है| हिंदू धर्म में पाठ करना एक जरूरी प्रक्रिया मानी गई है। पाठ से जहां व्यक्ति को आत्मीय सुख और शांति प्राप्ति होती है वहीं इससे भगवान का आशीर्वाद भी मिलता है।.

यज्ञ

मत्स्यपुराण में कहा गया है कि जब पांच आवश्यक घटक - देवता, हवन द्रव्य या प्रसाद, वेद मंत्र, दैवीय नियम और ब्राह्मण को उपहार - होते हैं, तो यह एक यज्ञ है। विश्व कल्याण के लिए किया गया कोई भी शुभ कार्य यज्ञ है।.